क्यो निरंकारी सन्त महापुरूष एक दूसरे के पैर छूते हैं? क्या राज है इसका ?

सन्तो- महापुरूषो जी धन निरंकार जी और जो धन निरंकार को नही जानते हैं, उनको मेरा हाथ जोड़कर नमस्कार स्वीकार हो।
सतगुरु माता सुदिक्षा जी सविदंर हरदेव सिंह महाराज                                      जी 

आज हम बात करेंगे बहुत ही जरुरी और मुख्य टोपिक के बारे मे। जो है -- चरण स्पर्श करना।


क्या होता है कि हम अक्सर लोगो को कहता सुनते हैं कि निरंकारी मिशन के लोग एक-दूसरे के पाँव छूते हैं ? ना किसी को छोटा देखते हैं ना किसी को बड़ा देखते हैं। बेटा पिता के पैर छूता है, पिता बेटे के पैर छूता है, पत्नी, पती के पैर छूती है पती पत्नि के पैर छूता है। माता पुत्र के, पुत्र माता के। छोटा भाई, बड़े भाई के और बड़ा भाई, छोटे भाई के। तो इस तरह से सभी लोग अलग-अलग बाते करते हैं।


तो कहीं ना कहीं उनकी ये बाते सही है। आज हम उसी गुत्थी को सुलझाने की कोशिश करेगें। कि इसके पीछे क्या राज है? क्या क्रोनोलोजी है समझिये - सन्त निरंकारी मिशन के प्रचारक महापुरूष **श्री पंडित अब्दुल गफ्फार खान जी** ने भी समझाया कि केवल मनुष्य योनि ही ऐसी है जिसमे मोक्ष मिल सकता है और इस योनि को पाने के लिये देवी देवता भी तरसते है। जिससे कि उन्हे भी मोक्ष मिल जाये।
इसके लिये तुलसीदास जी ने भी कहा है कि-
*बड़े भाग मानूष तन पावा। सूर दुर्लभ सब ग्रन्थन गावा
अर्थात बड़े भाग से ये मनुष्य शरीर मिलता है, जिसकी कामना सभी देवी देवता करते हैं। जब देवताओं को भी ये मनुष्य शरीर नही मिलता है तो ये भगवान विष्णु से बोलते हैं कि हमे धरती लोक मे मानव बनाकर भेज दो। क्यो बोलते हैं ऐसा क्योकि उन्हे पता है कि ""साधन धाम मोक्ष कर द्वारा **
अर्थात मुक्ति मिल जायेगी।

                          (सतगुरु चरण)
तो जब देवी देवता मनुष्य शरीर धारण करके धरती लोक मे नही आ सकते तब सभी देवी देवताओं ने एक मीटिंग की और एक प्रस्ताव पारित किया । कि यदि हम मनुष्य शरीर धारण नही कर सकते तो कम से कम हम मनुष्य शरीर पे कब्जा तो कर सकते हैं ना।
इस प्रकार सभी ने मनुष्य के एक-एक अंग पर कब्जा करना शुरू कर दिया। देखिये कैसे-
* आँखो मे सूर्य देवता ने कब्जा कर लिया। जैसे कि हम देखते हैं कि किसी को गुस्सा आ जाता है तो आँखे लाल पीली हो जाती है अर्थात सूर्य देवता प्रकट हो जाते हैं।
* कानो पे आकाश देवता का कब्जा है जैसे कि हम बोलते हैं कि ये आकाशवाणी दिल्ली है, आकाशवाणी नजीबाबाद है, आकाशवाणी बरेली है आदि। आदि। ये आकाश देवता सुनने का काम करते हैं।
* हमारी नाक मे अश्वनी कुमारो का निवास स्थान है ।
* हमारी जुबान पे वरूण देवता का निवास स्थान है जो जल के देवता हैंं, जैसे ही कोई सूखी वस्तु हभ खाते हैं तो उसकी गीला करने का काम वरूण देवता का है।


*दोनो हाथो पे ईन्दर देवता का वास है।
तो जब भगवान विष्णु ने ये सब देखा तो आश्चर्य मे पड़ गये कि कमाल है मेरे बनाये हुऐ मानव शरीर पर सब कब्जा करे जा रहे और मेरे लिये कोई जगह खाली नही छोड़ी।
तो भगवान् विष्णु ने शोचा कि अभी पैर खाली इनको ही पकड़ लो अर्थात पैरो पर ही कब्जा किया जाये। फिर क्या था भगवान विष्णु ने पैरो पर कब्जा कर लिया।
तो इस तरह से हर इन्सान के चरनो मे भगवान विष्णु का वास है। विष्णु का मतलब होता है-  पालन करने वाला।


तो क्या जब परमात्मा अर्थात विष्णु भगवान् हमारे शरीर मे आता है तो क्या वह ये देखता है कि ये बच्चे का शरीर है इसमे ना रहूँ, ये बुजुर्ग का शरीर है, ये छोटे का शरीर है, ये बड़े का शरीर है इसमे ना रहूँ।
नहीं सन्तो परमात्मा तो सभी के शरीर मे समान रूप से रहते हैं। उसके लिये ना कोई बड़ा है ना छोटा।
तो इस तरह से हम केवल विष्णु भगवान् के आगे झुकते हैं ना कि किसी शरीर या इन्सान के आगे।
तो निरंकारी सन्तो के ये बात समझ मे आ गई कि सभी मे एक ही निरंकार अर्थात भगवान का वास है तो हमे अपने बनाने वाले के आगे झुकने मे कोई आश्चर्य नहीं होता है।


इसका दूसरा कारण ये भी है कि किसी के आगे झूकने से हमारा अहंकार खतम हो जाता है। तो निरंकारी मिशन की यही सिखलाई है कि किसी के आगे झूको तो सामने वाले को अपने से ग्यानी समझो।
तो जब निरंकारी महापुरूषो को ये बात समझ मे आ जाती है तब बोलते हैं कि-
 झूकजा, झूकजा ऐ दिले नादान।
झूकने वाले को झूक-झूक कर खूदा मिलता है।।
तो सन्तो भक्तजनों किसी के आगे झूकने मे कोई बुराई नही है।
तो इस प्रकार ये था राज की निरंकारी महापुरूष एक दूसरे के पैर क्यो छूते हैं ? ये था वो राज जो वेदो और पुराणों ने बताया है। ।
अगर जानकारी अच्छी लगी तो इसको लाइक और सेयर कर देना सभी व्हाटसप ग्रुप, फेशबुक ग्रुप और अन्य ग्रुप मे। जिससे निरंकारीयो के साथ-साथ सभी को इसके बारे मे पता लगे।
धन निरंकार जी।
धन्यवाद।






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