कलयुग का ऐसा भक्त जिसका नाम अमर सन्तो की लिस्ट मे आ गया। एक ऐसे सन्त जिनके नाम से निरंकारी सरोवर का नाम सन्तोख सरोवर पड़ गया। निरंकारी सरोवर के खुलने का समय ?

सन्तो,महापुरूषो जी धन निरंकार जी और जो धन निरंकार को नही जानते हैं, उनको मेरा हाथ जोड़कर नमस्कार स्वीकार हो।
                     (सतगुरु माता सुदिक्षा जी)
आज हम बात करेंगे एक ऐसे सन्त के विषय मे जिनको कलयुग का हनुमान कहने मे कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। जिनके तप, त्याग और निस्वार्थ सेवा की बदौलत ही एक ऐसा अमरकुडं बनके तैयार हुआ जिसमे स्नान मात्र से हमारे सभी कष्ट दूर हो जातें हैं अर्थात एक डुबकी विश्वास और श्रद्धा की लगाने से ही शरीर के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

                           (सरोवर गेट)
इस अमरकुडं की महानता के बारे मे पहले पढ चूकें है, जिन्होंने नही पढा है तो वो पहले उसको भी पढ ले।


ऐसे महान सन्त का यश ये पूरा संसार गाता है। उनकी भी इस निरंकार की भाँति पूजा होती है, उनका भी लोग प्रभु का सच्चा भक्त मानकर यशोगान करते हैं।
ऐसे सन्त भाग्य से मिलते हैं। जो निरंकार के बनाये हुऐ बन्दो से प्यार करता है उनकी झोली ये खुशियों से भर देता है।
जो भी प्राणी निरंकार परभु के कार्य मे अपना छोटा सा भी योगदान देता है, ये उसके जन्मो-जन्मान्तर के दूख-दर्द खतम कर देता है।


तो ऐसे सहनशील, निष्ठावान और कर्मयोगी महापुरूष का नाम है-  महात्मा रेवेन्द्र सन्तोख सिंह जी।
जिनको निरंकारी जगत मे सच्चे सेवादार की तरह पूजा जाता है।
तो किस प्रकार इन्होंने अपना योगदान दिया? क्यो निरंकारी जगत इनकी सेवा का बखान करता है ? देखते है।
हुआ क्या था कि बाबा अवतार सिंह जी महाराज जी ने दिल्ली-बुराडी रोड़ के पास जो जमीन ली थी, उसमे सरोवर का निर्माण होना था।

(बाबा अवतार सिंह जी महाराज जी।)

शुरू मे उस जमीन मे जंगल थे और बहुत से कीड़े-मकोड़े, सर्प जंगली जानवर इत्यादि रहते थे। कुछ समय बाद 
बाबा गुरबचन अवतार सिंह जी के सानिध्य मे इस पवित्र-पावन सरोवर का निर्माण कार्य शुरु हुआ।

           (बाबा गुरूबचन सिंह जी महाराज जी)

वैसे तो सैकड़ों महापुरूषो ने इस सरोवर के निर्माण मे अपना योगदान दिया, पर इनमे महात्मा सन्तोख सिंह जी का योगदान प्रमुख था।
क्योकि जब सरोवर का निर्माण चल रहा था तो कीड़े मकोड़े आदि के भय की वजह से जो भी सन्तजन वहां सेवा करते थे, वो सायं होते ही अपने-अपने घर को लोट जाते थे। पर सन्तोख महात्मा ऐसे सन्त थे जो अकेले दिन और रात हर समय वहाँ पर रूक जाते थे, कयोंकि उनको लगता था कि कहीं पूरे दिन का किया हुआ काम कोई जीव-जन्तु न बिगाड़ दे अर्थात कहीं पूरे दिन की मेहनत पे पानी ना फिर जाये।
इसलिये वो सतगुरु कि आज्ञा लेकर रात को अकेले वहीं रूक जाते थे। उन्हे किसी भी जंगली जानवर से डर नही लगता था।

             (Pic Sourses - Mobile Camera)

तो इस प्रकार उनकी सूझ-बूझ और मेहनत से एक विशाल सरोवर का निर्माण हो पाया।
उनके इस प्रकार के कार्य से खुश होकर बाबा जी ने इस सरोवर का नाम उनके ही नाम से रख दिया । यानि सरोवर का नाम सन्तोख सरोवर रख दिया।
तो इस प्रकार सतगुरु ने अनका नाम अमर सन्तो की लिस्ट मे ला दिया।

सतगुरू के आशीर्वाद और निरंकारी सरोवर का नाम सन्तोख सरोवर रखने की वजह से पूरी दूनियाँ मे उनके इस निष्काम सेवा की  चर्चा होती है।
"जिस प्रकार भगवान् राम का क़ोई भी काम भक्त हनुमान जी बिना किसी फल के निष्काम भाव से करते थे, वो नहीं शोचते थे कि इस काम का फल क्या मिलेगा, बस हमेशा मन मे यही विचार आता था कि मेरे सतगुरु अर्थात भगवान का वचन आया है जिसको हर कीमत पे पूरा करना है।"

ठीक इसी प्रकार महात्मा सन्तोख जी भी किसी भी कार्य मे कभी ना नही करते थे और  हमेशा सतगुरु का आशीर्वाद मानकर उसे निभाते थे।
तो अगर तुलना की जाये तो महात्मा सन्तोख जी को आज के युग का हनुमान जी कहने मे हमे कोई अतिश्योक्ति नही होती है।


इस तरह से सरोवर की महिमा को बढाने के लिये सरोवर के चारो तरफ हरे -भरे पार्क का निर्माण किया गया। जिससे हमे शुद्ध हवा मिलती है।
दिल्ली के आस पास के लोग सुबह- शाम शुद्ध वायु के लिये इस पार्क मे भ्रमण करते हैं।
भक्तो दर्शन के लिये निरंकारी फाउंटेन ऑफ वननेश  बनाया गया है।
जो हमे आपस मे मिलजुलकर रहना सिखाता है।

 
                      (फाउंटेन ऑफ वननेश )
दूसरी तरफ निरंकारी प्रकाशन विभाग है जहाँ पर मिशन से समबन्धित हर प्रकार की किताबे मिल जाती है।
और निरंकारी म्यूजियम बनाया गया है जिसमे निरंकारी मिशन के इतिहास के बारे मे बताया जाता है। और इस मिशन को बढावा देने वाले सन्तो के बारे मे बताया जाता है।


तो इस प्रकार साल भर मे हजारो लाखो की संख्या मे भक्त श्रद्धालु पूरे  विश्व से आते हैं, और इस सरोवर मे श्रद्धा और विश्वास से एक डूबकी लगाते हैं।
तो इस प्रकार ये सरोवर हमेशा सन्तो के दर्शन के लिये हमेशा खुला रहता है।
* सरोवर मे स्नान करने का समय--
सुबह 8.00 am- 1.00 pm तक।
दोपहर 2.00 pm - 5.30 pm तक।
* म्यूजियम के खुलने का  समय--
सुबह 9.00 am - 1.00 pm तक।
3.00 pm -7.00 pm तक
तथा
*फाउंटेन ऑफ वननेश खुलने का समय--
हर शुक्रवार, शनिवार और रविवार सायं 6.300 बजे शुरू होता है।
तो इस प्रकार ये था महात्मा सन्तोख सिंह जी द्वारा बनाया गया सरोवर। जिसमे एक डुबकी लगाने से ही सारे पाप दूर हो जाते हैं। तो क्यो ना ऐसे सन्त को पूजा जाये?


दास की आप सभी से विनती है कि जीवन मे एक श्रद्धा और विश्वास से एक डुबकी अवश्य लगाये।
बक्स लेना जी।
धन निरंकार जी ।
धन्यवाद्।





Comments

Popular posts from this blog

सेवा सतगुरु की। सतगुरु की सेवा मे कितना आनन्द होता है।

हमे जहाँ मे रहकर एक जिंदा मिसाल क्यो बनना है? जहाँ मे रहकर अपने आप को सजाना संवारना है। हरदेव वाणी संकलन। पद-150

नफरत को दिल से मिटाना है। नफरत और प्यार मे सम्बन्ध है।