होलिका दहन क्यो करते हैं ? रंगो का त्यौहार होली, क्यो मनाई जाती है ?

सन्तो, महापुरूषो जी धन निरंकार जी और जो धन निरंकार को नही जानते, उनको मेरा हाथ जोड़कर नमस्कार स्वीकार हो।

आज हम बात करेंगे कि होली का त्यौहार क्यो मनाया जाता है ? क्यो? एक भक्त की वजह से पूरे भारत वर्ष मे रगों का त्यौहार मनाया जाता है। ये सतयुग की कहानी है।
इसकी पुष्टि श्रीमदभागवत गीता और पुराणों मे की जाती है।


कहा जाता है कि झासी से लगभग 80 किमी दूरी पर स्थित ऐरच नगर है, जो सतयुग मे राजा हिरण्यकशिपु की राजधानी थी।
                   (Pic Sourse- Google)
माना जाता है कि हिरण्यकशिपु बहुत बड़ा राक्षस था।
उसने अपने तप और त्याग से भगवान ब्रहमा जी को खुश कर लिया।
                (हिरण्यकशिपु ) Pic Sourse-Google

ब्रहमा जी ने जब उनसे वरदान मांगने के लिये कहा तो हिरण्यकशिपु के मन मे अहंकार आ गया ।

उसने ब्रहमा जी से कहा कि मुझे ऐसा वरदान दो जिसमे मुझे ना इन्सान मार सके ना जानवर। ना अस्त्र ना शस्त्र। ना आग ना पानी। ना देवता ना राक्षस। कोई भी मुझको  मार ना पाये।


ब्रहमा जी ने कहा- 'तथास्तु' अर्थात ऐसा ही होगा।
तो इस प्रकार हिरण्यकशिपु ने एक तरह से अमर रहने का वरदान मांग लिया।
वरदान मिलते हि हिरण्यकशिपु के अन्दर का अहंकार बढ गया। उसने अपनी प्रजा मे ऐलान करा दिया कि आज से कोई भी विष्णु की पूजा नहीं करेगा।
आज से सिर्फ मै आप सबका भगवान् हूँ और आप सभी मेरी पूजा करेंगे। मेरी अराधना करेंगे।


वह इतना निर्दयी था कि जो कोई उसकी पूजा करने से मना करता था वो उसको जान से मार देता था। सभी उससे बहुत परेशान थे। डर के मारे सभी उसकी पूजा करने लगे परन्तु एक शख्स था जो उससे बिलकुल नही डरता था और वह भगवान विष्णु की पूजा करता था। जी हाँ वो शख्स था स्वयं हिरण्यकशिपु का पुत्र-- भक्त प्रह्लाद।

                        (हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद)
प्रह्लाद भगवान विष्णु जी का अनन्य भक्त था। वह हर समय विष्णु जी के सुुमिरन मे लीन रहता था। भगवान विष्णु भी परहलाद को बहुुुत अच्छा भक्त मानते थे।


हिरण्यकशिपु को ये बात बहुत बुरी लगी कि परी दूनियाँ मेरी पूजा करती है जबकि उसका स्वयं का पुत्र उसकी पूजा नही करता।
इसी बजह से हिरण्यकशिपु ने भक्त प्रह्लाद को कई बार मारने की कोशिश की, पर हर बार भगवान विष्णु उसको बचा लेते थे। हिरण्यकशिपु ने भक्त प्रह्लाद को मारने के कई उपाय किये जैसे- उसको सांपो के तहखाने मे बन्द करवा दिया।

 बहां से उसको भगवान विष्णु जी ने बचा लिया फिर हाथी से कुचलवाने की कोशिश की।


बहां से भी उसको भगवान विष्णु जी ने बचा लिया।
जब इन सब से बात नही बनी तो हिरण्यकशिपु ने अपने सैनिकों को बोलकर प्रह्लाद को एक ऊँचे पर्वत से वेतवा नदी मे फेकने का उपाय बनाया। जब सैनिकों ने भक्त प्रह्लाद को पर्वत से नीचे फेंका तो भगवान विष्णु ने उसको गोद मे ऊठा लिया और सुरक्षित ऊपर ले आऐ।


तो इस प्रकार हर बार भक्त को भगवान बचाते रहे ।
तभी कहा भी है कि- भगवान, भगत के वस मे होते हैं। जब आवाज दोगे तो भक्त की लाज बचाने तुरन्त दोडे चले आते हैं।
जब हिरण्यकशिपु ने भक्त प्रह्लाद को मरवाने के सारे प्रयास कर लिये।
तो एक बार हिरण्यकशिपु की बहन जिसका नाम होलिका था, ने हिरण्यकशिपु को बताया कि मुझे आग मे ना जलने का वरदान प्राप्त है, तो मै प्रह्लाद को लेकर आग मे बैठ जाऊँगी जिससे मैं आग मे नही जलूगी और प्रह्लाद जलकर मर जायेगा।


तो इस प्रकार होलिका भक्त प्रह्लाद को लेकर अग्नि मे बैठ गयी।
पर हुआ इसके विपरीत भगवान विष्णु जी की कृपा से भक्त प्रह्लाद तो जलने से बच गये जबकि होलिका का दहन हो गया अर्थात होलिका जलकर राख हो गई।

तो इस प्रकार तो होली का दहन किया जाता है। अर्थात इस प्रकार होली को जलाया जाता है।


और इसे रंगो का त्यौहार बनाने के लिये आगे की कहानी देखते हैं। जब हिरण्यकशिपु ने भक्त प्रह्लाद को मारने के लिये खम्भे से बांधा तो भगवान विष्णु जी आधे नर और आधे सिंह का रूप धारण करके उस खम्भे से प्रकट हो गये और अपने धारदार नाखूनों की सहायता से हिरण्यकशिपु को मार डाला।

                         (नरसिंह)
विष्णु जी ने आधे नर और आधे सिंह का रूप इसलिये लिया जिससे उसके वरदान पर भी कोई असर ना पड़े।
तो इस प्रकार झासी के लोगो ने रगं और गूलाल लगाकर अपनी आजादी का जश्न मनाया।


तो इस प्रकार यह रंगो का त्यौहार- होली मनायी जाती है।
वास्तव मे होली को सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक दिखाया जाता है। 
अतः भक्त प्रह्लाद की वजह से पूरे भारत वर्ष मे यह त्यौहार बड़े ही धूमदाम से बनाया जाता है।
अन्त मे आप सभी से विनती करना चाहता हूँ कि इस त्यौहार को प्यार से मनाये।


किसी के साथ रगं लगाने मे ज़बरदस्ती ना करे। पता नही किसी को क्या समस्या है, क्यो रगं लगवाना नही चाहता है।
कृपया करके केवल सूखे रगं, गूलाल इत्यादि का प्रयोग करे। पक्के रगं लगाने से बचे । बड़ी कृपा होगी जी।
और अन्त मे एक और बात कहना चाहता हूँ कि प्रयास अगर अच्छा लगे तो Comment जरूर कर दिया करो। कोई सलाह देनी हो तो बता सकते हैं।
धन निरंकार जी।
धन्यवाद् 

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